गर्भावस्था के दौरान आवश्यक सप्लीमेंट क्या है?HealthPlanet

Posted on Fri 3rd Feb 2023 : 15:27

स्वस्थ गर्भावस्था और सेहतमंद शिशु के लिए जरुरी है कि आपको सही मात्रा में विटामिन और मिनरल्स मिलें। आपको ये सभी अपने भोजन से मिल सकते हैं, मगर इनमें से कुछ जैसे कि फॉलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम और विटामिन डी के लिए आपको प्रसवपूर्व अनुपूरक (प्रीनेटल सप्लीमेंट) लेने होंगे।

पहली तिमाही में मुझे कौन से अनुपूरकों की जरुरत होगी?
फॉलिक एसिड
पहली तिमाही में सबसे जरुरी पोषक तत्व है फॉलिक एसिड।

गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने में 5 मि.ग्रा. फॉलिक एसिड लेने की सलाह दी जाती है। भारत में उपलब्ध सप्लीमेंट अलग-अलग स्ट्रेन्थ के होते हैं। डॉक्टर आपकी सेहत, गर्भस्थ शिशु में तंत्रिका तंत्र विकार होने के खतरे और आपके क्षेत्र में उपलब्ध सप्लीमेंट के आधार पर आपके लिए उचित सप्लीमेंट बताएंगी।

विटामिन बी6 (पाइराइडॉक्सिन)
अगर विटामिन बी6 की कमी हो तो आपको मिचली रहने की संभावना हो सकती है। माना जाता है कि जिन गर्भवती माँओं को गंभीर मिचली रहती है, उन्हें बी6 अनुपूरक लेने से लक्षणों में आराम मिलता है।

हम यह नहीं जानते कि विटामिन बी6 मिचली से राहत कैसे प्रदान करता है। संभव है कि विटामिन बी6 हमारे शरीर में विशिष्ट एमिनो एसिड (प्रोटीन) का संसाधन करने में मदद करता है, जो शायद मिचली को कम करने में सहायक है।

हालांकि, विशेषज्ञ अभी निश्चित नहीं हैं कि गर्भावस्था में कितना विटामिन बी6 सुरक्षित है। इसलिए इसे नियमित उपचार के तौर पर लेने की सलाह नहीं दी जाती।

अगर आप गर्भावस्था में बी6 सप्लीमेंट लेने के बारे में विचार कर रही हैं तो पहले डॉक्टर से बात कर लें। वे आपको बता सकती हैं कि आपको वास्तव में इसकी जरुरत है या नहीं और कितनी मात्रा में इसे लेना है। आपको यह भी देखना होगा कि प्रीनेटल विटामिन की गोलियों में दी गई बी6 की मात्रा एक खुराक के तौर पर गिनी जाएगी या नहीं। ध्यान रखें कि प्रसवपूर्व अनुपूरकों में विटामिन बी6 की मात्रा अलग-अलग हो सकती है।
गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में कौन से सप्लीमेंट्स लेने होंगे?
आयरन
अधिकांश गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था की शुरुआत में आयरन की कमी रहती है और उन्हें आहार से इतना आयरन नहीं मिल पाता कि गर्भावस्था में आयरन की बढ़ती जरुरत पूरी हो सके। इसकी वजह से आयरन की कमी वाला एनीमिया हो सकता है। आयरन की कमी वाले एनीमिया से बचाव करके आप समय से पहले डिलीवरी, कम जन्म वजन शिशु और नवजात शिशु की मौत के खतरे को कम कर सकती हैं।

क्योंकि भारत में एनीमिया बहुत आम है, इसलिए डॉक्टर दूसरी तिमाही की शुरुआत से रोजाना 0.5 मि.ग्रा फॉलिक एसिड के साथ 100 मि.ग्रा एलीमेंटल आयरन की गोली लेने की सलाह देती हैं।

कैल्शियम (विटामिन डी फोर्टिफाइड)
जब आप गर्भवती होती हैं, तो गर्भस्थ शिशु को ज्यादा कैल्शियम की जरुरत होती है। कैल्शियम शिशु की हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने के साथ-साथ स्वस्थ नसों और मांसपेशियों (हृदय की भी) के विकास में मदद करता है। यह हृदय गति विकसित करने और खून के थक्के जमने में भी मदद करता है।

वसा में घुलनशील (फैट सोल्यूबल) विटामिन डी शिशु की हड्डियों और दांतों को बनाने में मदद करता है। विटामिन डी आपके शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के स्तर को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। कैल्शियम और फॉस्फेट आपकी हड्डियों और दांतों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। विटामिन डी आपको संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है।

अगर प्रेगनेंसी में आपको विटामिन डी की कमी हो तो, आपके शिशु को भी जन्म के समय इस विटामिन की कमी हो सकती है। इससे शिशु को सूखा रोग (रिकेट्स) होने का खतरा हो सकता है। यह हड्डी टूटने, विकृति आने, हड्डियों का उचित विकास न होने और शारीरिक विकास में देरी का कारण बन सकता है।

आपको प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही की शुरुआत से ही कैल्शियम और आयरन के सप्लीमेंट लेने की सलाह दी जाएगी।

आपको इन्हें पूरी गर्भावस्था में और स्तनपान करवाने के दौरान भी लेना होगा। डॉक्टर आपकी जरुरत, स्वास्थ्य और खान-पान की आदतों के आधार पर खुराक को कम-ज्यादा कर सकती हैं।

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